एक दीप जला रखा है..
दिल की चोखट पे एक दीप जला रखा है..
सांस तक भी नहीं लेते है, तुझे सोचते वक्त..
हमने इस काम को भी, पलकों पे उठा रखा है..
रूठ जाते हो तो कुछ और हसीन लगते हो..
हमने येह सोच के ही तुमको खफ़ा रखा है..
चैन लेने नही देता येह किसी तरह से मुझे..
तेरी यादों ने जो दिल मे तूफ़ां मचा रखा है..
जाने वाले ने कहा था के वो लौट आयेगा ज़रूर..
एक इसी आस पे दरवाज़ा, हमने खुला रखा है..
तेरे जाने से जो धूल उठी थी गम की..
हमने उस धूल को, आंखों मे बसा रखा है..
मुझको कल शाम से वो बहुत याद आने लगा..
दिलने मुद्दतों से जो एक इंसान भुला रखा है..
आखिरी बार जो आया था मेरे नाम पैगाम..
मैने उसी कागज़ को दिल से लगा रखा है..
दिल की चौखट पे एक दीप जला रखा है..
