दर्द भरा शायरी,बेवफाई शायरी, Dard bhara bewafai ki shayri सारे बेवफाओं के नाम Jishke liye kisi ki sachhi Mohabbat ki koi kadr nhi.
क्यों चाह कर भी मैंने अभी तक उसकी एक तस्वीर अभी भी अपने अन्दर छिपाई
हुई है? आखिर ऐसा क्यों होता है की जब भी उसे भूलना चाहू तो वो तस्वीर
सामने आ जाती हैं। दिल जाने क्यों उसकी बेवफाई से दिल्लगी कर बैठा है जो
अभी तक उसकी एक झलक पाकर खुद को अथाह दर्द में सामने को मजबूर कर देता है।
काश की किसी को इस मर्ज़ की दवां मिल जाए और इस बेवफाई के दर्द से निजात
मिल सके शायद किसी दिन।।।
खैर दिल से तो आज भी एक ही आवाज आती है :
चाह कर भी न भूल पाया हु, ऐ बेवफा तुझे....अक्सर मेरे अश्क छलककर, तन्हा छोड़ जाते है मुझे.....
आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा
पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मेरी मोहब्बत मेरे दिल की गफलत थी
मैं बेसबब ही उम्र भर तुझे कोसता रहा…..
आखिर ये बेवफाई और वफ़ा क्या है
तेरे जाने के बाद देर तक सोचता रहा……
मैं इसे किस्मत कहूँ या बदकिस्मती अपनी
तुझे पाने के बाद भी तुझे खोजता रहा….
सुना था वो मेरे दर्द मे ही छुपा है कहीं
ये बेवफा
पता नहीं ये क्या हुआ है ??दिल रो रहा है फुट फुटकर
और ये बेवफा होठ
मुस्कुरा रहे है ????
दर्द की दास्ताँ बयां करने के
ये भी अलग अंदाज़ होगे ....
दुनिया जान न ले अपने दर्द को कभी
इस लिए इसे छुपा लेनेको
ये लब मुस्कुराते रहते होगे ......
बस ये रात ही तो है सखी सहेली मेरी ,
ये सिरहाने का तकिया है गवाह इकलौता ,
जिसकी नमीसे ऑस जमती है
सहरमें फूलों पर ,
और तकिया एक नज़्मको
खारे पानीसे धो देता है .........
किसी को यूँ रुलाया नहीं करते;
झूठे ख्वाब किसी को दिखाया नहीं करते;
अगर कोई आपकी जिंदगी में ख़ास नहीं है;
तो उसे रह-रह के ये असहास दिलाया नहीं करते।
इसे इत्तिफ़ाक़ समझो या मेरे दर्द की हकीक़त;
आँखे जब भी नम हुई, वजह तुम ही निकले।
तुम को फुर्सत जो कभी मिल जाए;
तो खुद से मुझको निजात दे देना।
अपनी यादें...
अपनी यादें अपनी बातें लेकर जाना भूल गये;
जाने वाले जल्दी में मिलकर जाना भूल गये;
मुड़-मुड़ कर देखा था जाते वक़्त रास्ते में उन्होंने;
जैसे कुछ जरुरी था, जो वो हमें बताना भूल गये;
वक़्त-ए-रुखसत भी रो रहा था हमारी बेबसी पर;
उनके आंसू तो वहीं रह गये, वो बाहर ही आना भूल गये.....................
